हिमवाणी
एस आर हरनोट की बहुचर्चित कहानी ‘बिल्लियां बतियाती है‘, हिन्दी की कालजयी कहानियों में शामिल की गई है। ‘हिन्दी की कालजयी कहानियां’ का पांच खंडों में साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रकाशन किया जा रहा है जिसका संपादन प्रख्यात लेखक स्व. कमलेश्वर ने किया है।
उन्होंने इस कहानी का चयन अकादेमी की इस महत्वपूर्ण व वृहद् योजना के लिए किया था। यह सूचना साहित्य अकादेमी के उप सचिव श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने हरनोट को पत्र लिख कर दी है।

एस आर हरनोट
‘बिल्लियां बतियाती है’ कहानी कुछ सालों पहले प्रसिद्ध पत्रिका ‘पहल‘ में प्रकाशित हुई थी और छपते ही यह बेहद चर्चित हुई। कमलेश्वर के शब्दों में “बिल्लियां बतियाती है कहानी अद्भुत कहानी है जो एक ताजा अंदाज, कथ्य का नया कोण और सहजता लिए हुए हैं।”
प्रख्यात आलोचक डॉ० नामवर सिंह ने भी दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में इस कहानी की प्रशंसा की थी। अनेक लेखकों, आलोचकों और पाठकों ने हरनोट की इस कहानी को सराहा है। युवा आलोचक गौतम सान्याल ने इस कहानी पर एक लम्बा लेख लिखा था जिसके कुछ अंश मुम्बई से प्रकाशित होने वाली हिन्दी की पत्रिका ‘हिमाचल मित्र‘ के अगामी अंक में प्रकाशित किए जा रहे हैं और साथ ही इस कहानी को प्रमुखता से पुनः प्रकाशित किया जा रहा है।
इन्टरनेट की प्रमुख हिन्दी वेबजीन ‘हिन्दीनेस्ट’ पर भी यह कहानी प्रकाशित की गई है।
जब हरनोट का बहुचर्चित कहानी संग्रह ‘दारोश और अन्य कहानियां‘ प्रकाशित हुआ तो उसमें यह पहली कहानी है। इस संग्रह पर हरनोट को ‘अन्तरराष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान’ जब लंदन में मिला तो इस कहानी का लंदन के नेहरू सेन्टर में समारोह के दिन मंचन भी किया गया था। इस कहानी का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है।





That is some great news. BTW Harnot sahib is also a very good photographer. One would be amazed seeing the pics he has clicked.
यह कहानी कहीं से पढ़ने को मिल सकती है? क्या कोई ऑनलाइन कड़ी है?
भाई हरनोट जी
बिल्लियां बतियाती हैं को हिन्दी साहित्य की कालजयी कहानियों में स्थान मिलने पर कथा यू.के. गौरवान्वित महसूस करती है। दारोश कथा संग्रह को जब हमारी संस्था ने सम्मानित किया था, हमें तब भी मालूम था कि यह कहानियां कालजयी हैं। आज हमारी पसन्द पर हमारे बुज़ुर्गों की सहमति का ठप्पा भी लग गया।
कथा यू.के. के लन्दन एवं भारत के पदाधिकारियों की ओर से आपको ढेर सी बधाई।
तेजेन्द्र शर्मा
General Secretary - Katha (UK)