चम्बा फर्स्ट: कैसे बने पूर्व सैनिक चयन लाल प्रदेश के सबसे बड़े कीवी उत्पादक

इनके पास आज कीवी के 3 बगीचे है जिनमें लगभग 1,000 कीवी के पौधे हैं।

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चयन लाल जी अपने कीवी के बगीचे में

चम्बा के साथ लगते सन्डू गॉंव के पूर्व सैनिक चयन लाल जी इलाके में बागवानी में सफलता प्राप्त करके एक शानदार उदाहरण पेश कर रहे हैं। चरण लाल जी हर साल लगभग 100 से 130 क्विंटल कीवी उगा कर हिमाचल प्रदेश में एक मिसाल कायम कर रहे हैं। इनके पास आज कीवी के 3 बगीचे है जिनमें लगभग 1,000 कीवी के पौधे हैं और साथ ही सेब, नाशपती, अनार के उत्पादन के लिए भी चरण लाल जी काफी उत्साह से काम कर रहे हैं। वे बागवानी में वर्ष 2000 से अपना हाथ आज़मा रहे हैं।

चम्बा की शाल घाटी बन सकती है कीवी हब

हिमवाणी से हुई बातचीत में चयन लाल जी ने बताया कि 68 की उम्र में भी उनके अंदर काम करने की इच्छाशक्ति खत्म नही हई है; बल्कि दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। आने वाले सालों में वे अपनी खाली पड़ी जमीन पर नये पौधे लगा कर 500 क्विंटल कीवी हर साल उगाने का लक्ष्य ठान कर बैठे हैं। “उन्होंने बताया, “मेरी विदेशी हॉवर्ड प्रजाति की कीवी तैयार करने की योजना भी तैयार है। अगर मैं इस योजना में सफल हो जाता हूँ तो मेरी साल की 50 लाख की कीवी का कारोबार पहुँच जायेगा, जिस से विदेशी कीवी के आयात में भी कमी आएगी और देश की भी मुद्रा बचेगी।”

चयन लाल जी अपनी कीवी की नर्सरी में

चयन लाल जी अपनी कीवी की नर्सरी में

नये बागवानोंको सहयोग और प्रेरणा देना लगता है अच्छा

चयन लाल जी कहते हैं कि इलाके में कीवी की फसल को देख कर इलाके के लोग भी धीरे धीरे इसको अपनाने लग गये हैं। लोग उनके पास सलाह मशवरे के लिए आते रहते हैं। उन्होंने बहुत से लोगों को बागवानी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त में पौधे भी दिए हैं, और समय समय पर लोगों को कीवी और अन्य फसलों के बारे जानकारी देते रहते हैं। और यह उनके मन को भाता भी है कि लोग उनके पास जानकारी लेने के लिए आते रहते हैं।

स्वप्रेरणा से करें किसानी, कृषि से किनारा ही चम्बा के पिछड़ने कीवजह

चयन लाल जी बताते हैं कि किसान को स्वप्रेरणा से ही कृषि और बागवानी करनी चाहिए। परन्तु, आज चम्बा के लोग 3,000-4,000 की नौकरी के लिए भी कृषि से किनारा कर रहे हैं; और यह चम्बा के पिछड़ेपन का कारण भी बनता जा रहा है। उन्होंने कहा:

“चम्बा की धरती, जलवायु दोंनों हर तरह की कृषि के लिए उपयुक्त है, परन्तु लोग दिन प्रति दिन किसानी और बागवानी से किनारा कर रहे हैं। इसके लिए सरकारों को समय समय पर किसानों के प्रोत्साहन के लिए कार्य करना चाहिए।”

विलुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने का काम व् प्रकृति प्रेमी

चयन लाल जी बगानों में कई विलुप्त हो रहे फलों के पौधे देखे जा सकते हैं, और बहुत सी प्रजातियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उनको बागबानी में नये नये प्रयोग करने का भी शौक है। चयन लाल प्रकृति प्रेमी भी हैं और किसी को भी जंगलों में शिकार आदि करने नहीं देते। उनका कहना है, “प्रकृति हमें बहुत कुछ देती है। अतः हमें वनों और वन्य जीवों की रक्षा करनी चाहिए।”

चयन लाल जी हिमवाणी के संवाददाता अंकित चंदेल के साथ

चयन लाल जी हिमवाणी के संवाददाता अंकित चंदेल के साथ

बंदर और मौसम परिवर्तन बड़ी परेशानी

चयन लाल की मानें तो पहले चम्बा में बंदरो का इतना आंतक नहीं था, परन्तु पिछले 5-6 सालों में चम्बा में बंदरों के आतंक से कई किसानों ने  बागवानी और कृषि छोड़ दी है। पिछली सरकार में हुए बन्दर नसबंदी अभियान की नाकामी का परिणाम चम्बा को भुगतना पड़ रहा है। बाहरी जिलों से लाकर बंदरों को यहाँ छोड़ा गया और लगातार बंदरों की संख्या का बढना चिंता का विषय है। साथ ही, समय पर बारिश और बर्फवारी का न होना भी वागबानी के लिए परेशानी का विषय है।

चम्बा फर्स्ट अभियान से जुड़ें

यह लेख #ChambaFirst (चम्बा फर्स्ट) अभियान के तहत लिखा गया है। इस अभियान के तहत हम आप तक चम्बा के अलग अलग पहुलओंको लाते रहेंगे। हमारा प्रयास रहेगा की हम जनता के विचार एकत्रित कर, चम्बा को पिछड़ेपन के खिताब से मुक्त कराने हेतु, रीडिसकवर्ड के साथ मिल कर एक श्वेत पत्र लाएं जिसमें चम्बा के विकास के लिए विचार प्रस्तुत होंगे।

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